जलवायु परिवर्तन : ... तो छाया में भी 6 घंटे जीवित रहना होगा मुश्किल


नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन संबंधी अंतर-सरकार पैनल (आईपीसीसी) ने छठी मूल्यांकन रिपोर्ट की दूसरी किस्त जारी करते हुए चेतावनी दी है कि जोखिमों को कम करने की कोशिशों के बावजूद मानवजनित जलवायु परिवर्तन प्रकृति में खतरनाक एवं व्यापक बाधा खड़ी कर रहा है। यदि इसी तरह उत्सर्जन बढ़ता रहा तो वेट बल्ब का तापमान भारत के अधिकांश हिस्से में 35 डिग्री सेल्सियस के खतरनाक स्तर पर पहुंच जाएगा। और कहीं तो उससे भी ज्यादा हो जाएगा और अगर ऐसा हुआ तो वह हिस्से रहने लायक नहीं रह जाएंगे। अभी यह स्तर 25-30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा है लेकिन भारत में इसका अधिकतम स्तर शायद ही कभी 31 डिग्री सेल्सियस के पार गया है।
 
छाया में भी 6 घंटे जीवित रहना होगा मुश्किल
31 डिग्री के पार वेट बल्ब तापमान मनुष्य के जीवन यापन के लिए खतरनाक है। वहीं अगर यह स्तर 35 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया तो एक फिट और स्वस्थ व्यक्ति के लिए छाया में भी छह घंटे तक जीवित रहना मुश्किल हो जाएगा। दुनिया के शहरों में लगातार बढ़ रहे वेट बल्ब तापमान की वजह से मैदानी इलाकों के शहरों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है।  

भारत में इस तामपान में अगर एक से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होती है तो भारत में चावल का उत्पादन 10 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है। बढ़ते तापमान की वजह से गंगा, साबरमती, सिंधु, अमू दरिया जैसी नदियों में जल संकट की चेतावनी भी दी गई है। इसी तरह मक्का का उत्पादन 25 से 70 प्रतिशत तक घट सकता है।

भारत में बढ़ेगा मलेरिया का प्रकोप
यही नहीं अगर स्थिति ऐसी ही बनी रही है और तापमान पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो 2030 तक भारत में मलेरिया का प्रकोप बढ़ जाएगा। और इसकी जद में हिमालय क्षेत्र, पूर्वी और दक्षिण भारत के राज्यों में सबसे ज्यादा होंगे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई करने में देरी हुई तो पूरी दुनिया के लिए स्थिति काफी गंभीर होगी। मौसम बदलने के कारण ज्यादा या कम बारिश, बाढ़ की विभीषिका और लू के थपेड़े बढ़ सकते हैं। इसके अलावा बढ़ते तापमान के कारण कृषि उत्पादन में बड़े पैमाने पर कमी की आशंका जताई गई है। जिससे भारत भी अछूता नहीं रहेगा।

वैश्विक उत्सर्जन में 14 फीसद वृद्धि की आशंका 
अगले दो दशक में दुनियाभर में औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। तापमान बढ़ने के कारण खाद्य सुरक्षा, पानी की किल्लत, जंगल में आग, हेल्थ, ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, शहरी ढांचा आदि कमजोर होने, बाढ़ जैसी समस्याएं बढ़ने का अनुमान जताया गया है। 

जलवायु परिवर्तन की वजह से तटीय इलाकों वाली जनसंख्या दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में प्रभावित होगी। भारतीय शहरों में ज्यादा गर्मी, शहरों में बाढ़, समुद्र का जलस्तर बढ़ने की समस्याएं और चक्रवाती तूफान की आशंका बनी रहेगी।

संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट 67 देशों के 270 से अधिक वैज्ञानिकों ने तैयार की है और 195 सरकारों ने मंजूर की है। अपने संबोधन में संयुक्त राष्ट्र महासचिव जनरल एंतोनियो गुतारेस ने आगा किया कि आगामी दशक में वैश्विक उत्सर्जन में 14 फीसद वृद्धि की आशंका है जिसके त्रासदपूर्ण परिणाम होंगे।

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