अधिकारी विहीन कृषि विभाग, खाद की कमी से किसान बेहाल


जबलपुर। किसान महासंघ ने कहा है कि प्रदेश में खाद और यूरिया की भारी कमी ने किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। जब खेती का सीजन अपने चरम पर है, तब सरकार की उदासीनता और कृषि विभाग में अधिकारियों की कमी ने स्थिति को और भी चिंताजनक बना दिया है। खाद और यूरिया के लिए किसान सोसायटी में लंबी-लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी परेशानियों का कोई समाधान होता नहीं दिख रहा।  

किसान महासंघ ने आगे कहा कि कृषि विभाग का मौजूदा ढांचा भी समस्या को बढ़ा रहा है। जबलपुर में संयुक्त निदेशक कृषि के.एस. नेताम पिछले छह वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत हैं। वहीं, उप निदेशक का महत्वपूर्ण पद पिछले एक साल से खाली है। इस पद का प्रभार एस.के. निगम को दिया गया है, जो पहले से ही कई अन्य जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। निगम, जो मूल रूप से आत्मा परियोजना में पदस्थ हैं, किसान ट्रेनिंग सेंटर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर आत्मा और डिप्टी डायरेक्टर कृषि का अतिरिक्त भार भी संभाल रहे हैं। एक ही अधिकारी पर कई जिम्मेदारियों का बोझ होने से विभाग की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है।  
  • एक ही स्थान पर लंबे समय से जमे अधिकारी 
किसान महासंघ के अनुसार पदस्थापन और स्थानांतरण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एस.के. निगम जैसे अधिकारी पिछले दस वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। कृषि विभाग के कई एसडीओ भी 12-13 वर्षों से अपने पद पर बने हुए हैं। किसान महासंघ ने आरोप लगाया है कि वसूली और अन्य निजी स्वार्थों के चलते अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर जमे रहते हैं और स्थानांतरण की प्रक्रिया में निष्क्रियता दिखाई जाती है।  
  • किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं  
किसान महासंघ ने बताया कि खाद और यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करना किसानों की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हालांकि, विभागीय लापरवाही के चलते किसानों को हर सीजन में इन्हीं समस्याओं से जूझना पड़ता है। कृषि विभाग के पास न तो पर्याप्त अधिकारी हैं, और न ही मौजूदा अधिकारियों के पास समय। किसानों को उनकी जरूरतों के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है, जबकि अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहते हैं।  
  • किसान महासंघ की माँग  
किसान महासंघ ने सरकार से मांग की है कि कृषि विभाग के उन अधिकारियों का तत्काल तबादला किया जाए जो वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। महासंघ का कहना है कि यदि अधिकारियों का स्थानांतरण होता है, तो नई ऊर्जा के साथ किसानों की समस्याओं का समाधान निकल सकता है। इसके अलावा, रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए ताकि विभागीय कार्य सुचारू रूप से चल सके।  
  • सरकार की जिम्मेदारी  
एक ओर जहाँ प्रदेश सरकार किसानों की हितैषी होने का दावा करती है, वहीं कृषि विभाग की इस हालत ने उन दावों को खोखला साबित कर दिया है। अधिकारियों की कमी और खाद की अनुपलब्धता ने प्रदेश के किसानों को बुरी तरह प्रभावित किया है। यह समय है जब सरकार को गंभीरता से इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए।

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