नई दिल्ली। एक हालिया रिपोर्ट में आर्थिक असमानता का ऐसा सच सामने आया है जो वाकई चौंकाने वाला है। चेन्नई के वित्तीय योजनाकार डी. मुथुकृष्णन द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत की आधी आबादी के पास सिर्फ 3.5 लाख रुपये या उससे कम की संपत्ति है। यह खुलासा वैश्विक स्तर पर भी आर्थिक असमानता की गहरी खाई को उजागर करता है।
अमीर देश, लेकिन अमीर लोग बेहद कम
मुथुकृष्णन के अनुसार, दुनिया में अमीर देशों की संख्या तो अधिक है, लेकिन वहां अमीर लोगों का प्रतिशत बेहद कम है। दुनिया की वयस्क आबादी का मात्र 1% हिस्सा ही 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.6 करोड़ रुपये) से अधिक संपत्ति का मालिक है।
अगर आपकी कुल संपत्ति 90 लाख रुपये या उससे अधिक है, तो आप सिंगापुर के आधे नागरिकों से अधिक धनी माने जाएंगे। वहीं, 96 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति (मुख्य निवास को छोड़कर) आपको अमेरिका की 50% आबादी से भी अधिक संपन्न बना देती है।
भारत की स्थिति और अधिक चिंताजनक
जब विकसित देशों में आर्थिक असमानता इतनी अधिक है, तो भारत की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। भारत की 50% आबादी के पास 3.5 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति नहीं है।
दुनिया की शीर्ष 10% आबादी को छोड़ दिया जाए, तो शेष 90% लोग अपनी एक भी तनख्वाह गंवाने पर गंभीर वित्तीय संकट में फंस सकते हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि भविष्य में एआई, ऑटोमेशन और रोबोटिक्स के बढ़ते प्रभाव के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए हालात और भी कठिन हो सकते हैं।
धन का संकेंद्रण और बढ़ती असमानता
डी. मुथुकृष्णन ने अपने आंकड़ों के जरिए यह भी बताया कि धन मुट्ठीभर लोगों के पास केंद्रित हो रहा है, और यह प्रवृत्ति दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में भी देखी जा रही है।
इसके बावजूद, स्विट्जरलैंड दुनिया का सबसे समृद्ध देश बना हुआ है, जहां प्रति वयस्क औसतन $685,000 (लगभग 6 करोड़ रुपये) की संपत्ति है।
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