राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में जबलपुर मंडल की भूमिका अहम

 

जबलपुर/अक्षर सत्ता। जबलपुर रेल मंडल का हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में लगातार सक्रिय भूमिका निभाना यह दर्शाता है कि राजभाषा हिंदी को सरकारी कार्यों में समुचित स्थान देने हेतु मंडल पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। इस बैठक में लिए गए निर्णयों के सफल क्रियान्वयन से रेलवे के कार्यों में हिंदी का प्रयोग बढ़ेगा, जिससे कर्मचारियों और यात्रियों दोनों को लाभ मिलेगा

राजभाषा के प्रचार-प्रसार हेतु भविष्य की योजनाएँ

इस बैठक में भविष्य के लिए कुछ महत्वपूर्ण कार्ययोजनाएँ भी बनाई गईं, जिनके माध्यम से हिंदी का प्रयोग और अधिक प्रभावी किया जा सकेगा। इनमें शामिल हैं—

सभी विभागों में हिंदी कार्यशालाओं का आयोजन – राजभाषा नियमों और हिंदी में कार्य करने की प्रक्रिया को सरल एवं सहज बनाने हेतु नियमित कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी।
ऑनलाइन हिंदी प्रशिक्षण – डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए कर्मचारियों को हिंदी टाइपिंग एवं अनुवाद संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
हिंदी पुस्तकालयों का विस्तार – कार्यालयों में हिंदी पुस्तकों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ ई-बुक्स और डिजिटल हिंदी साहित्य को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
हिंदी प्रोत्साहन योजना – कर्मचारियों को हिंदी में कार्य करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार योजनाएँ लागू की जाएँगी।
हिंदी में प्रशासनिक कार्य – रेलवे के सभी प्रशासनिक दस्तावेज, रिपोर्ट, पत्राचार और नोटिस अधिकाधिक हिंदी में तैयार किए जाएंगे।

समाज और यात्रियों के लिए लाभकारी कदम

रेलवे एक ऐसी सेवा है, जिसका सीधा संबंध जनता से है। हिंदी भाषी क्षेत्र में होने के कारण यात्रियों के साथ हिंदी में संवाद करना यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक होगा

रेलवे स्टेशन पर सभी सूचनाएँ हिंदी में उपलब्ध होंगी।
यात्रा टिकट, सूचना पट्ट और अनाउंसमेंट में हिंदी का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।
रेलवे कर्मचारियों को हिंदी में कार्य करने हेतु अधिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

राजभाषा नीति का क्रियान्वयन: जबलपुर मंडल की प्रतिबद्धता

इस बैठक से यह स्पष्ट हुआ कि जबलपुर रेल मंडल राजभाषा हिंदी के उपयोग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सतत प्रयास कर रहा है। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन और कर्मचारियों के बीच समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाएगा

बैठक के अंत में सभी अधिकारियों ने हिंदी भाषा के अधिकतम उपयोग का संकल्प लिया और इसे रेलवे प्रशासन एवं यात्रियों के बीच संवाद का मुख्य माध्यम बनाने के लिए निरंतर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई

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