भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को गुड़ी पड़वा और नव संवत्सर की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहारों का निर्धारण मंगल तिथियों के आधार पर किया जाता है। खगोलीय दृष्टि से गुड़ी पड़वा या वर्ष प्रतिपदा वर्ष की पहली मंगल तिथि होती है, जिसके आधार पर होली और दीपावली जैसे पर्वों की तिथियों का निर्धारण किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह तिथि सनातन परंपरा की अनुपम धरोहर है, जो समृद्धि, उल्लास और नवचेतना का संदेश देती है। इस अवसर पर उन्होंने कामना की कि नव संवत्सर सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और आनंद का संचार करे।
मुख्यमंत्री निवास में हुआ विशेष आयोजन
गुड़ी पड़वा के एक दिन पूर्व मुख्यमंत्री निवास में वृहद मराठी समाज के साथ विशेष आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के गणमान्यजनों ने मंत्रोच्चार के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव का तिलक और पुष्पमाला से स्वागत किया। उन्हें अंगवस्त्र और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मराठी साहित्य अकादमी, श्री संत सेवा संघ पुणे, पिपलानी गणेश मंडल भोपाल और कोलार महाराष्ट्र मंडल भोपाल की ओर से उन्हें चार परंपरागत गुड़ी भेंट की गई।
भोजपत्र पत्रिका का विमोचन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश मराठी साहित्य संघ, भोपाल द्वारा प्रकाशित पत्रिका ‘भोजपत्र’ का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संस्कृति और परंपराओं के उत्थान का अभियान चल रहा है। यह अभियान न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक समृद्धि को सशक्त कर रहा है, बल्कि समाज को जोड़ने का कार्य भी कर रहा है।
भारतीय संस्कृति का वैश्विक संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूलभाव ‘वसुधैव कुटुंबकम’ है, जो सबको साथ लेकर चलने और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रबंधन और आत्मगौरव के महत्वपूर्ण सूत्र मिलते हैं। सरकार का प्रयास है कि भारतीय त्योहारों को समाज और प्रशासन सहयोग से उल्लासपूर्वक मनाए।
पर्व और त्योहारों का महत्व
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्व और त्योहारों के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि जन्माष्टमी, राम नवमी, नवरात्रि, एकादशी, द्वादशी जैसे अवसरों पर उपवास रखा जाता है, इसलिए इन्हें पर्व कहा जाता है, जबकि होली, दीपावली जैसे आनंद और मंगलकामनाओं से जुड़े अवसर त्योहार कहलाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की समृद्ध शब्द संपदा के कारण हर अवसर के लिए अलग-अलग अभिव्यक्तियां उपलब्ध हैं, जबकि अन्य भाषाओं में ऐसा नहीं है।
गुड़ी पड़वा उत्सव में बड़ी संख्या में उपस्थित रहे समाज बंधु
कार्यक्रम में जबलपुर के पूर्व महापौर और मराठी साहित्य अकादमी के निर्देशक श्री सदानंद गोडबोले, डॉ. अभिजीत देशमुख, श्रीमती नीलिमा देशपांडे सहित रीवा, इंदौर, भोपाल, मंडल, जबलपुर और विदिशा से आए मराठी समाज के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने गुड़ी पड़वा पर्व को हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया।
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