भाजपा को मिल सकता है नया अध्यक्ष!
संघ के इस संकेत के बाद माना जा रहा है कि राम नवमी के बाद भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल सकता है। हालांकि, यह बदलाव संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संवाद के बाद ही होगा, जो लंबे समय से बाधित है। इस बीच, संजय जोशी के नाम पर सहमति बनने की चर्चा तेज हो गई हैं, जिससे भाजपा के भीतर हलचल बढ़ गई है।
मोदी-जोशी की संभावित मुलाकात पर नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 मार्च को नागपुर स्थित संघ मुख्यालय पहुंचने वाले हैं। इस दौरान वह माधव नेत्र चिकित्सालय के शिलान्यास सहित कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। लेकिन संघ के करीबी सूत्रों का कहना है कि इस दौरे में मोदी और संजय जोशी की मुलाकात भी संभव है। यदि यह मुलाकात होती है, तो दोनों नेताओं के बीच दो दशक से जारी कड़वाहट दूर होने की संभावना बढ़ जाएगी।
पुरानी दोस्ती में आई थी दरार
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, 1990 के दशक में मोदी और जोशी की जोड़ी पार्टी में बेहद मजबूत मानी जाती थी। लेकिन वर्ष 2000 में गुजरात में केशूभाई पटेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों को राज्य से बाहर भेज दिया गया था। बाद में, नरेंद्र मोदी 2002 में गुजरात के सीएम बने और फिर राष्ट्रीय राजनीति में लगातार आगे बढ़ते गए। वहीं, एक विवादास्पद सीडी प्रकरण के कारण संजय जोशी को राजनीतिक वनवास झेलना पड़ा। हालांकि, उनके सांगठनिक कौशल और व्यवहार कुशलता के कारण वह बिना सत्ता के भी प्रभावशाली बने रहे।
18 अप्रैल को हो सकता है बड़ा ऐलान
सूत्रों के अनुसार, 18 अप्रैल को भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में नए अध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। इसके लिए बेंगलुरु में पहले से बैठक निर्धारित है। जैसे ही भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर तस्वीर साफ होगी, दिल्ली और लखनऊ के बीच जारी राजनीतिक असमंजस भी समाप्त हो सकता है।
योगी आदित्यनाथ को मिल सकती है बड़ी भूमिका
संघ की रणनीति के तहत हिंदुत्व और सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भाजपा का बड़ा चेहरा माना जा रहा है। हाल ही में एक मीडिया साक्षात्कार में दिए गए उनके बयान को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। यदि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके बाद उत्तर प्रदेश का नया सीएम कोई ऐसा चेहरा हो सकता है, जो राजनीतिक गलियारों में चौंकाने वाला होगा।
2047 तक सत्ता में रहने की रणनीति?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि संघ और भाजपा की जुगलबंदी 2047 तक सत्ता में बने रहने की दीर्घकालिक योजना पर कार्य कर रही है। इसी रणनीति के तहत संगठन में बड़े बदलाव और नए चेहरों को आगे लाने की तैयारी चल रही है। आने वाले दिनों में भाजपा और संघ के फैसलों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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