मानकुँवर बाई कॉलेज में लोक संगीत एवं रंगोत्सव की धूम


जबलपुर। शासकीय मानकुँवर बाई कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, जबलपुर में भारतीय संस्कृति के उल्लास को समर्पित रंगोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। आई क्यू ए सी, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में रंग पंचमी का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर लोक संगीत कार्यक्रम में सुरमई स्वरों ने समां बांध दिया। महाविद्यालय के संगीत विभाग की छात्राओं ने मां सरस्वती की वंदना के साथ रंगारंग कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्वागत बेला में मुख्य अतिथि डॉ. अखिलेश सप्रे (पूर्व प्राध्यापक, संगीत विभाग) का पुष्पगुच्छ से अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में तबला वादक श्री सोमनाथ सोनी, हारमोनियम वादक श्री हरिसिंह तांडिया, एवं श्री लोकेश मालवीय की सराहनीय प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

लोकगीतों की सजीव प्रस्तुतियाँ

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डॉ. अखिलेश सप्रे द्वारा प्रस्तुत लोकगीत 'बिरज में धूम मचायो कान्हा' से हुई, जिसने दर्शकों को ब्रज की गलियों की सैर करा दी। प्राचार्य डॉ. स्मृति शुक्ला ने लोकगीतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय संस्कृति में उनकी भूमिका पर विचार साझा किए।

इसके बाद संगीत विभाग की छात्राओं ने 'होली और कृष्ण कन्हैया', 'राधिका रानी की रासलीला', तथा 'कन्हैया डार गयो आँखों में लाल अबीर' जैसे मनमोहक गीतों की प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

बी.ए. तृतीय वर्ष की छात्राएँ एकता, दीपांशी और अपर्णा ने 'सिर बांधे मुकुट खेले होली' गीत प्रस्तुत किया, जबकि हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. नीना उपाध्याय एवं दर्शनशास्त्र विभाग की डॉ. नेहा शाक्य ने 'आज बिरज में होरी रे रसिया' गीत से माहौल को सुरमय बना दिया।

प्राध्यापकों ने भी दी शानदार प्रस्तुतियाँ

हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. इंद्र सिंह वरकड़े ने 'सखी बरसाने नहीं आए', वहीं डॉ. बलिराम अहिरवार ने 'कर दो मुकदमा जारी अदालत न जैहै मुरारी' जैसे लोकगीतों से सभागार में उत्साह भर दिया।

संगीत विभाग के प्राध्यापक डॉ. गौरीशंकर ने बघेली दादरा 'रतिया बैरन पिया को लिए जाए रे' प्रस्तुत कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। राजनीति शास्त्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. वरुण राव बांसोड़कर ने जब 'रंग बरसे भीगे चुनरवाली' गीत गाया, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।

लोकगीतों के माध्यम से सांस्कृतिक यात्रा

कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं ने ब्रज, अवध, बघेलखंड, एवं देश के अन्य क्षेत्रों के लोकगीतों के माध्यम से एक अद्भुत सांस्कृतिक यात्रा का अनुभव किया।

इस भव्य आयोजन का सफल संचालन डॉ. वरुण राव बांसोड़कर ने किया। प्राचार्य डॉ. स्मृति शुक्ला के मार्गदर्शन में आयोजित इस रंगारंग लोकगीत संध्या का उपस्थित प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं ने भरपूर आनंद उठाया।



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