Wakf Amendment Bill : कानून बनने की राह पर वक्फ संशोधन विधेयक आधी रात के बाद तक लोकसभा में चली चर्चा


नई दिल्ली। बहुप्रतीक्षित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025, कानून बनने के अंतिम चरण में है। बुधवार की आधी रात के बाद तक लोकसभा में इस पर गहन चर्चा हुई, जिसमें पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखी गई। तकनीकी कारणों से मतदान में विलंब हुआ, लेकिन अंततः विधेयक पारित हो गया। अब इसे गुरुवार को राज्यसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जनता दल (यूनाइटेड) ने विधेयक का समर्थन किया। इस दौरान, तेलुगु देशम पार्टी के तीन संशोधनों को स्वीकार किया गया। वहीं, विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के घटक दलों ने इसका जोरदार विरोध किया।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार और वक्फ बोर्ड मस्जिद सहित किसी भी धार्मिक संस्था के धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं कि सरकार मस्जिद, दरगाह और मुसलमानों की संपत्तियों को छीन लेगी, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विधेयक पूर्व प्रभाव से लागू नहीं होगा।

रिजिजू ने यह भी कहा कि यदि सरकार वक्फ संशोधन विधेयक नहीं लाती, तो संसद भवन सहित कई इमारतें दिल्ली वक्फ बोर्ड के अधीन हो जातीं। उन्होंने कांग्रेस शासनकाल में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सही प्रबंधन होता, तो न केवल मुसलमानों की, बल्कि देश की तकदीर भी बदल जाती।

उन्होंने विपक्षी दलों के दावों को खारिज करते हुए कहा कि 1995 में जब व्यापक संशोधनों के साथ कानून बनाया गया था, तब किसी ने इसे असंवैधानिक नहीं कहा था। अब जब हम इसमें सुधार कर रहे हैं, तो इसे असंवैधानिक बताया जा रहा है।

रिजिजू ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले, 2013 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाए, जिनसे कई संपत्तियां दिल्ली वक्फ बोर्ड के अधीन हो जातीं। उन्होंने कहा कि 2013 में वक्फ कानून में यह बदलाव किया गया कि इस देश में किसी भी धर्म का व्यक्ति वक्फ बना सकता है।

प्रस्तावित प्रावधान:

रिजिजू ने कहा कि विधेयक में महत्वपूर्ण प्रावधान रखा गया है कि महिलाओं और बच्चों के अधिकार सुरक्षित करके ही वक्फ बनाया जा सकता है। आदिवासियों की जमीन को वक्फ संपत्ति नहीं बनाया जा सकता। वक्फ वही बना सकता है, जिसने कम से कम पांच साल इस्लाम का पालन किया हो। वक्फ बोर्ड को धर्मनिरपेक्ष और समावेशी बनाया जा रहा है, जिसमें शिया, सुन्नी और बोहरा आदि सभी के प्रतिनिधि होंगे। इसमें पिछड़े मुसलमान, महिलाएं, गैर-मुस्लिम विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इस कानून के लागू होने के बाद सबके मन में नए सवेरे की उम्मीद जागेगी और नए कानून का नाम भी 'उम्मीद' रखा जा रहा है।

हर वर्ग के हितों की रक्षा होगी: जदयू

जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के सांसद एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को उनकी पार्टी का पूर्ण समर्थन दिया। उन्होंने लोकसभा में कहा कि देश में ऐसा विमर्श गढ़ा जा रहा है कि यह विधेयक मुसलमान विरोधी है, जबकि हकीकत यह है कि मुस्लिम समुदाय के हर वर्ग के हितों की रक्षा होगी।

संविधान के मूल ढांचे पर आक्रमण: कांग्रेस

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय की जमीन पर सरकार की नजर है। उन्होंने कहा कि कानून को मजबूत बनाने के लिए संशोधन होना चाहिए, लेकिन इस विधेयक से देश में समस्याएं, मसले और मुकदमेबाजी बढ़ेगी। यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे पर आक्रमण है। इसका मूल उद्देश्य संविधान को कमजोर करना, भ्रम फैलाना, अल्पसंख्यक समुदायों को अपमानित करना और भारतीय समुदाय को विभाजित करना है। मंत्री जी ने कहा कि विधेयक लाने से पहले विस्तार से चर्चा की गई, यह पूरी तरह से गुमराह करने वाली बात है।

गोगोई ने अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की 2023 में हुई चार बैठकों का विवरण पटल पर रखने की मांग करते हुए दावा किया कि उनमें से एक में भी नए संशोधन विधेयक का जिक्र तक नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि जितनी भी बार बैठक हुई, उनमें एक भी बयान नहीं है कि हमें एक नया वक्फ संशोधन विधेयक चाहिए। नवंबर 2023 तक मंत्रालय ने वाजिब ही नहीं समझा कि नया विधेयक लाने की जरूरत है, तो इस विधेयक को किसने बनाया, यह कहां से आ गया? उन्होंने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के बारे में कहा जा रहा है कि उसमें सबकी राय सुनी गई। लेकिन विपक्ष के एक भी संशोधन को स्वीकार नहीं किया गया।

भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति का नया रूप: अखिलेश

समाजवादी पार्टी (सपा) सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए सरकार वक्फ (संशोधन) विधेयक लाई है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा का सियासी हठ और उसकी सांप्रदायिक राजनीति का एक नया रूप है। वक्फ की जमीन से बड़ा मुद्दा वह जमीन है, जिस पर चीन ने अपने गांव बसा लिए हैं। भाजपा मुसलमान भाइयों की जमीन चिह्नित करने की कोशिश कर रही है, ताकि महाकुंभ में मरने वाले या खो गए लोगों पर पर्दा पड़ जाए।

संसद का कानून सबको स्वीकार करना पड़ेगा: शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह वक्फ पर प्रस्तावित कानून नहीं मानने की धमकी दे रहा है, लेकिन यह संसद द्वारा पारित किया गया कानून होगा और इसे सभी को स्वीकार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और इसके सहयोगी दल वोट बैंक के लिए लोगों को डरा रहे हैं। लेकिन, किसी समुदाय के लोगों को डरने की जरूरत नहीं। 

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